बोकारो जिले के फुसरो स्थित मकोली सेंट्रल कॉलोनी में सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) के सरकारी क्वार्टर पर अवैध कब्जा करने को लेकर डुमरी के विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में विधायक सहित झारखंड लेबर किसान महासंघ (जेएलकेएम) के सात नामजद कार्यकर्ताओं और 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ चंद्रपुरा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

क्वार्टर पर अवैध कब्जे का आरोप

मामले की शुरुआत 25 दिसंबर को हुई, जब जेएलकेएम के कार्यकर्ताओं ने सीसीएल के डी-2 क्वार्टर पर झंडा, बैनर, कुर्सी और दरी लगाकर कब्जा जमा लिया। यह क्वार्टर सीसीएल के प्रशिक्षु खनन अधिकारियों विनय वर्मा, राहुल राज और प्रदुमन कुमार के नाम आवंटित था। आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने क्वार्टर में रह रहे प्रशिक्षुओं को जबरन बाहर निकाल दिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।

सूचना मिलने पर सीआईएसएफ जवान मौके पर पहुंचे और कब्जा हटाने का प्रयास किया। हालांकि, विधायक समर्थक क्वार्टर खाली करने को तैयार नहीं थे। स्थिति बिगड़ने पर स्थानीय थाना सहित कई अन्य थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।

विधायक की पुलिस से बहस

रात करीब दो बजे विधायक जयराम महतो खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस और सीसीएल अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए और क्वार्टर खाली करने से इनकार कर दिया। विधायक ने पुलिसकर्मियों के साथ तीखी बहस की और उन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप है।

27 घंटे तक चला विवाद

यह मामला लगभग 27 घंटे तक खिंचा, जिसके बाद प्रशासन, सीसीएल प्रबंधन और विधायक के बीच बातचीत हुई। बेरमो एसडीएम मुकेश मछुआ के नेतृत्व में कई बीडीओ, सीओ और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। आखिरकार सहमति बनी और क्वार्टर को खाली कराया गया।

विधायक के आरोप

विधायक जयराम महतो ने प्रबंधन पर सीसीएल के अन्य क्वार्टरों पर बाहरी लोगों द्वारा अवैध कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सीसीएल के हजारों क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है, लेकिन प्रबंधन कार्रवाई नहीं करता। अगर बाहरी लोगों के कब्जे वाले क्वार्टर खाली कराए जाएंगे, तो हम भी यह क्वार्टर खाली कर देंगे।”

प्रबंधन का बयान

सीसीएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि डी-2 क्वार्टर 19 दिसंबर को प्रशिक्षु खनन अधिकारियों के नाम आवंटित किया गया था। इससे पहले यह क्वार्टर एएडीओसीएम परियोजना के अधिकारी दिनेश चंद्र राय के नाम पर आवंटित था, जो सितंबर 2024 में सेवानिवृत्त हो चुके थे।

अतिक्रमण की कार्रवाई

प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल और महिला जवानों की तैनाती के बाद क्वार्टर को खाली कराया। इस दौरान विधायक समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। समर्थकों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।

विधायक के समर्थकों की दलील

विधायक के समर्थकों का कहना है कि खाली पड़े क्वार्टर के लिए कई बार आवेदन दिया गया था, लेकिन आवंटन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन बाहरी लोगों को अवैध रूप से क्वार्टर में रहने दे रहा है, जबकि स्थानीय विस्थापितों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

प्रशासन का रुख सख्त

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अतिक्रमण का अंत

लगभग 27 घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद क्वार्टर को कब्जा मुक्त कर दिया गया। इस प्रकरण ने प्रशासन, प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है। अब देखना होगा कि अन्य अवैध कब्जों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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