रांची, 16 अगस्त 2025 – झारखंड के शिक्षा मंत्री और झामुमो के कद्दावर नेता रामदास सोरेन का 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती थे और शुक्रवार रात उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
हादसे के बाद बिगड़ी थी हालत
2 अगस्त को जमशेदपुर स्थित अपने आवास में बाथरूम में फिसलकर गिरने से उन्हें सिर में गंभीर चोट लगी थी। डॉक्टरों ने बताया कि इस हादसे में उनके दिमाग में चोट और खून का थक्का जम गया था। स्थानीय अस्पताल से तुरंत उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज कर रही थी। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः शुक्रवार को उनका निधन हो गया।
राजनीतिक और सामाजिक जीवन
रामदास सोरेन तीन बार विधायक चुने गए और वर्तमान में घाटशिला विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे और हमेशा आदिवासी अधिकारों, शिक्षा सुधार और ग्रामीण विकास के मुद्दों को मुखरता से उठाते रहे। हाल ही में 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को हराकर जीत दर्ज की थी।
नेताओं ने जताया शोक
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक संदेश जारी करते हुए कहा, “रामदास दा हमारे परिवार के वरिष्ठ सदस्य थे। उनका जाना हमारे लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक, दोनों ही रूप से अपूरणीय क्षति है।”
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह झारखंड के लिए एक बड़ी क्षति है।
भाजपा प्रवक्ता प्रटल शाह देव ने कहा, “12 दिनों के भीतर राज्य ने पहले Dishom Guru शिबू सोरेन और अब रामदास सोरेन को खो दिया। यह झारखंड के लिए गहरा सदमा है।”
अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि
सूत्रों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर शनिवार को रांची लाया जाएगा, जहां मुख्यमंत्री, मंत्रीमंडल के सदस्य और हज़ारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद उनके पैतृक गांव घाटशिला में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जनता में शोक
उनके निधन की खबर से पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। घाटशिला और आसपास के इलाकों में लोगों ने उन्हें “जनता का नेता” बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा गरीबों और वंचितों की आवाज़ उठाई।
रामदास सोरेन के जाने से न केवल झामुमो बल्कि पूरे राज्य की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है।