पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जिन्हें भारत के आर्थिक सुधारों का जनक माना जाता है, का गुरुवार रात 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे डॉ. सिंह ने अपने जीवनकाल में देश को आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूती देने में बड़ा योगदान दिया। उनके निधन के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार आज दिल्ली के निगमबोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
अंतिम संस्कार का कार्यक्रम
डॉ. सिंह का अंतिम संस्कार आज सुबह 11:45 बजे दिल्ली के निगमबोध घाट पर होगा। इससे पहले उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेताओं और गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक और जनता जुटी, जिन्होंने अपने प्रिय नेता को विदाई दी।
सात दिन का राष्ट्रीय शोक
केंद्र सरकार ने डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान में देशभर में सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और किसी भी प्रकार का आधिकारिक उत्सव या समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने भी अपने सभी कार्यक्रम, जिनमें 28 दिसंबर को होने वाला स्थापना दिवस समारोह शामिल है, स्थगित कर दिए हैं। पार्टी ने घोषणा की है कि ये सभी कार्यक्रम अब 3 जनवरी के बाद आयोजित किए जाएंगे।
स्मारक स्थल को लेकर विवाद
डॉ. सिंह के अंतिम संस्कार और स्मारक स्थल को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि डॉ. सिंह का अंतिम संस्कार उस स्थान पर किया जाए, जहां बाद में उनका स्मारक बनाया जा सके।
खड़गे ने अपने पत्र में लिखा, “डॉ. मनमोहन सिंह जैसे महान नेता का स्मारक उसी स्थान पर होना चाहिए, जहां उनका अंतिम संस्कार हो। यह भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों और महान नेताओं की परंपरा का हिस्सा रहा है।”
इस पर भाजपा के प्रवक्ता सीआर केसवन ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “यह विडंबना है कि कांग्रेस परंपराओं की बात कर रही है, जबकि उसने अपने कार्यकाल में पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का स्मारक तक नहीं बनाया।”
स्मारक के लिए केंद्र की स्थिति
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि डॉ. मनमोहन सिंह के लिए उचित स्थान पर स्मारक बनाया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया में समय लगेगा क्योंकि इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन करना होगा और स्थान आवंटित करना होगा। हालांकि, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पहले निगमबोध घाट पर पूरी की जाएगी।
कांग्रेस के भीतर असंतोष
डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और स्मारक को लेकर कांग्रेस के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि 2020 में उनके पिता के निधन के बाद कांग्रेस ने शोक सभा तक आयोजित नहीं की थी।
डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन और योगदान
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 1932 में हुआ था। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। डॉ. सिंह ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
1991 में, जब भारत आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, उस समय वे वित्त मंत्री बने और अपनी नीतियों से भारत को आर्थिक सुधारों के पथ पर ले गए। उन्हें भारत के आर्थिक उदारीकरण का जनक कहा जाता है। डॉ. सिंह 1991 में राज्यसभा के सदस्य बने और 1998 से 2004 तक विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया।
प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल
डॉ. सिंह ने 2004 से 2014 तक लगातार दो बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में देश ने आर्थिक और सामाजिक प्रगति के कई आयाम देखे। उन्हें 1987 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके योगदान के लिए उन्हें देश और विदेश में व्यापक प्रशंसा मिली।
दुनिया भर से शोक संदेश
डॉ. सिंह के निधन पर दुनियाभर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनके निधन पर संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
डॉ. मनमोहन सिंह का निधन केवल एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक महान अर्थशास्त्री और विचारक का जाना है। उनकी सादगी, ईमानदारी और नीतिगत समझ हमेशा देशवासियों को प्रेरणा देती रहेगी।