रांची, 30 अगस्त 2025 – रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का और आठ अन्य को छोटानागपुर टेनेंसी (सीएनटी) एक्ट के उल्लंघन का दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। तय समय पर जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला क्या है?
सीबीआई की जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2006 से 2008 के बीच एनोस एक्का ने सीएनटी एक्ट के प्रावधानों को दरकिनार कर आदिवासी भूमि का अवैध रूप से अधिग्रहण किया। आरोप है कि कई सौदों में भूमि उनकी पत्नी मेनन एक्का के नाम दर्ज की गई। इनमें रांची के हिनू, ऑरमांझी, नेवरी और सिरम टोली इलाके की जमीनें शामिल हैं।
सीएनटी एक्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
सीएनटी एक्ट, 1908 आदिवासियों की भूमि की सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है। इसके तहत गैर-आदिवासियों को आदिवासी जमीन खरीदने या स्थानांतरित करने पर रोक है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस कानून का उल्लंघन राज्य की मूल आत्मा और जनजातीय अधिकारों पर सीधा आघात है।
दोषियों की सूची
अदालत ने इस घोटाले में शामिल कई सरकारी अधिकारियों को भी दोषी करार दिया है। इनमें तत्कालीन भूमि सुधार उपसमाहर्ता, सर्किल इंस्पेक्टर, राजस्व कर्मचारी और अन्य शामिल हैं। सभी को समान अवधि की सजा सुनाई गई है।
अदालत की टिप्पणी
विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार या अवैध लेन-देन का नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों और जमीन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे अपराध राज्य की सामाजिक संरचना को कमजोर करते हैं।
आगे क्या?
सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है। मामले के राजनीतिक और सामाजिक असर को देखते हुए झारखंड की राजनीति में इस फैसले को बड़ा मोड़ माना जा रहा है।