रांची, 11 अगस्त 2026: झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब बड़े राजनीतिक और सामाजिक टकराव का रूप ले चुका है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में आज, 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। बंद का आह्वान भारतीय जनता पार्टी ने किया है।
इससे पहले सोमवार को हजारों छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए रांची में जुटे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद आंदोलन और राजनीतिक रूप से और तेज हो गया।
JPSC विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
झारखंड में चल रहा मौजूदा आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थियों की प्रमुख शिकायतें JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, मूल्यांकन से जुड़े सवाल और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रही हैं।
मामला खास तौर पर 14वीं JPSC परीक्षा और JSSC-CGL 2024 को लेकर लगातार चर्चा में है। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी से बढ़ा मामला
आंदोलन के बीच सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते को 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े कथित मामले में गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी ने लंबे समय से चले आ रहे परीक्षा विवाद को एक नया राजनीतिक और कानूनी आयाम दे दिया है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होती। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
JSSC-CGL 2024 को लेकर भी गंभीर सवाल
JPSC विवाद के साथ-साथ JSSC-CGL 2024 भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गया है। कुछ रिपोर्टों में सामने आए कथित CID दस्तावेजों के आधार पर परीक्षा में प्रश्नों के लीक होने और उन्हें व्हाट्सऐप के जरिए प्रसारित किए जाने के आरोपों पर सवाल उठे हैं।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कथित CID रिपोर्ट में 150 में से 120 प्रश्नों के लीक होने की बात सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में परीक्षा को पहले क्लीन चिट दिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन दावों और दस्तावेजों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और संबंधित आधिकारिक प्रक्रियाओं से ही तय होगी।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
आंदोलनकारी अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा JSSC-CGL 2024 की परीक्षा को लेकर भी है। प्रदर्शनकारी इस मामले में CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है। इसलिए यदि किसी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं, तो उसकी पारदर्शी जांच जरूरी है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से नहीं निकला समाधान
आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन मांगों पर पूरी सहमति नहीं बन सकी। रिपोर्टों के अनुसार सरकार JPSC PT को रद्द करने पर सहमत हुई, लेकिन अन्य प्रमुख मांगों को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद छात्रों ने विधानसभा मार्च जारी रखने का फैसला किया।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि आंदोलन को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं विपक्ष और आंदोलनकारी संगठन सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगा रहे हैं।
विधानसभा मार्च में बढ़ा तनाव
सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े। कई जगह बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश हुई और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की तथा झड़प की स्थिति बनी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया।
इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा। BJP ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में 11 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया।
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में देवेंद्र नाथ महतो
आंदोलन के दौरान JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो भी चर्चा में रहे। वह भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में भूख हड़ताल पर थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कई दिनों तक अनशन किया था।
उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
आज झारखंड बंद का क्या असर?
11 अगस्त के बंद को लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां प्रभावित होने की संभावना है। राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और प्रशासन की नजर संवेदनशील क्षेत्रों पर है।
बंद का मुख्य मुद्दा सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध है।
मामला अब केवल परीक्षा का नहीं, भरोसे का भी
झारखंड का मौजूदा छात्र आंदोलन अब केवल किसी एक परीक्षा के रद्द होने या दोबारा परीक्षा कराने की मांग तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। इसके केंद्र में सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता, परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का संस्थानों पर भरोसा है।
एक ओर छात्र निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार का पक्ष है कि प्रक्रिया को कानून और जांच के दायरे में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी और JSSC-CGL से जुड़े कथित दस्तावेजों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार, जांच एजेंसियां और आंदोलनकारी अभ्यर्थी किस तरह बातचीत के जरिए इस गतिरोध को समाप्त करते हैं और भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों का विश्वसनीय जवाब कब मिलता है।
नोट: इस खबर में “घोटाला”, “पेपर लीक” और “अनियमितता” जैसे शब्द उन मामलों के संदर्भ में इस्तेमाल किए गए हैं जिनकी शिकायत, आरोप या जांच की खबरें सामने आई हैं। किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही निश्चित मानी जाएगी।